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समस्त आईडब्ल्यूएमपी डी०डी० एवं भूमि संरक्षण अधिकारी की समीक्षा बैठक, योजना भवन, लखनऊ ---- | ---- इंदिरा गाँधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में " उद्यमिता एवं आजीविका" कार्यशाला ---- | ---- शारदा कमांड एवं रामगंगा कमांड की समीक्षा बैठक दिनांक : ०७ & ०८ - ०१ - २०१६ ---- | ---- तकनीकी विशेषज्ञ की समीक्षा बैठक ०३-१०-२०१५ ----|---- HBTI द्वारा डीपीआर पर 2 दिन प्रशिक्षण ०३-१०-२०१५ ----|---- शारदा कमॅंड डिपार्ट्मेनल मीट हेल्ड ऑन २१-०९-२०१५ ----|---- राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी (SLNA) 17 वीं बैठक की तारीख 30-07-2015 को आयोजित ----|---- विडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक दिनाक 24-07-2015 का कार्यवृत ----|---- प्रमुख सचिव - II सिंचाई विभाग- उत्तर प्रदेश शासन श्री टी वेंकटेश की अध्यक्षता में हुई वीडियो कान्फ्रेंसिंग सम्पन्न हुई ----| ---- तीन दिवसीय तकनीकी विशेषज्ञों का प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक लखनऊ में आयोजित ----|---- तीन दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक एस०एल०डी०सी० लखनऊ में आयोजित

समेकित वाटरषेड प्रबंधन कार्यक्रम (आई.डब्लू.एम.पी.)

एक संक्षिप्त परिचय

समेकित जल संग्रहण प्रबन्धन कार्यक्रम (आई0डब्लू0एम0पी0), भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के अन्तर्गत भूमि संसाधन विकास विभाग द्वारा संचालित एक वृहद् कार्यक्रम है यह कार्यक्रम इस मंत्रालय द्वारा संचालित पूर्व कार्यक्रमो, सूखोन्मुख क्षेत्र विकास कार्यक्रम (डी0पी0ए0पी0), मरुस्थल विकास कार्यक्रम (डी0डी0पी0) समेकित बंजर भूमि विकास परियोजना (आई0डब्लू0डी0पी0) को एकीकृत करके वित्तीय वर्ष 2008-09 से लागू किया गया है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत कुल वित्तीय प्राविधान का 90 प्रतिशत भाग भारत सरकार द्वारा पोषित तथा शेष 10 प्रतिशत प्रदेश सरकार द्वारा वहन की जा रही है। योजनांतर्गत भारत सरकार द्वारा स्वीकृत धनराषि से प्रारम्भिक/आस्था मूलक कार्यकलाप (इन्ट्री प्वाइंट एक्टिविटिज) क्षमता निर्माण (कैपिसिटी बिल्डिंग) जल संग्रहण विकास कार्य, आजीविका तथा उत्पादन प्रणाली एवं सूक्ष्म उद्यम आदि कार्य भी सम्पादित किए जाने का प्राविधान है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य वर्षा सिंचित क्षेत्रों मे वर्षा जल का संरक्षण कर भूमि मे नमी का संरक्षण तथा सूखे की स्थिति को यथा सम्भव कम करके फसलों विशेष कर दलहन व तिलहन की पैदावार में वृद्धि करना है। इसके लिये जल संग्रहण विकास/भूमि एवं जल संरक्षण कार्या/उपचारों हेतु 56 प्रतिषत की धनराषि मात्राकृत की गई है जिसके अन्तर्गत भूमि विकास कार्य, भूमि एवं नमी संरक्षण, कण्टूर बंडिग, चेक डैम, जल भराव व संचय बांधों आदि का निर्माण कर अधिक से अधिक वर्षा जल को बेकार बहने से रोक कर सतही तथा भूमिगत जल भण्डारण को बढावा देना है जिससे इस भण्डारित जल का उपयोग लाइफ सेविंग इरीगेशन के लिए किया जा सके। इसके साथ-साथ इस योजना के अन्तर्गत भूमि की हरीतिमा संवर्घन हेतु अकृष्य क्षेत्रों में वनीकरण, उद्यानीकरण, चरागाह विकास आदि कार्यो का भी प्राविधान है जिससे जल संग्रहण क्षेत्र के लाभार्थियों को ईधन, लकडी, व चारे आदि की आवश्यकता की भी पूर्ति होगी। इस योजना की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमे भूमिहीन/सम्पक्तिहीन, अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति, महिलाओं आदि के स्वयं सहायता समूहों के आजीविका कार्यकलापों के विकास हेतु 9 प्रतिषत की धनराषि मात्राकृत की गई है खेतिहर कृषकों को कृषि उत्पादन बढाने के लिए कृषि उत्पादन प्रणाली एवं उनके, परम्परागत कौशल व कुटीर उद्यमों को बढावा देने के लिए माइक्रोइन्टर प्राइजेज के अन्तर्गत 10 प्रतिषत की धनराषि मात्राकृत है जिसमें सामान्य कृषकों को 80 प्रतिषत तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति के कृषकों को 90 प्रतिषत अनुदान की व्यवस्था है।

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